Adhik Maas Amavasya 2020: 16 अक्टूबर को अमावस्या , 3 साल में एक बार आती है ये तिथि, पितृ शांति के लिए करें ये उपाय।

16 अक्टूबर, शुक्रवार को अधिक मास की अमावस्या है। ये तिथि 3 साल में एक बार आती है, इसलिए इसका विशेष महत्व है। अमावस्या को पितरों की तिथि कहा जाता है इसलिए इस दिन पितरों को प्रसन्न करने के उपाय किए जाते हैं।इस तिथि पर किए गए खास उपायों से पितरों की कृपा हमें मिल सकती है।

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अधिक मास कब व कैसे होता है?

पंचांग गणना के अनुसार एक सौर वर्ष में 365 दिन, 15 घटी, 31 पल व 30 विपल होते हैं जबकि चन्द्र वर्ष में 354 दिन, 22 घटी, 1 पल व 23 विपल होते हैं। सूर्य व चन्द्र दोनों वर्षों में 10 दिन, 53 घटी, 30 पल एवं 7 विपल का अंतर प्रत्येक वर्ष में रहता है।

जिस वर्ष अधिक मास होता है उस वर्ष में 12 के स्थान पर 13 महीने होते हैं। अधिक मास के माह का निर्णय सूर्य संक्रान्ति के आधार पर किया जाता है। जिस माह सूर्य संक्रान्ति नहीं होती वह मास अधिक मास कहलाता है।

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पितृ शांति के लिए उपाय:

  • अधिक मास की अमावस्या पर किसी पवित्र नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें। इससे भी पितृगण प्रसन्न होते हैं। पीपल में पितरों का वास माना गया है। अधिक मास की अमावस्या तिथि पर पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाया जाता हैं और गाय के शुद्ध घी का दीपक लगाया जाता हैं।
  • और किसी ब्राह्मण को भोजन के लिए घर बुलाएं या भोजन सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़ आदि हो, दान करें। अपने पितरों को याद कर गाय को हरा चारा खिला दें। इससे भी पितृ प्रसन्न व तृप्त हो जाते हैं।
  • अधिक मास की अमावस्या पर किसी ब्राह्मण को भोजन के लिए घर बुलाएं या भोजन सामग्री जिसमें आटा, दाल, फल, गुड़, घी आदि हो दान करें।
  • किसी पवित्र नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें। इससे भी पितृगण प्रसन्न होते हैं।
  • पीपल में पितरों का वास माना गया है। अधिक मास की अमावस्या पर पीपल पर जल चढ़ाएं और गाय के शुद्ध घी का दीपक लगाएं।
  • अमावस्या पर चावल के आटे से 5 पिंड बनाएं और इसे लाल कपड़े में लपेटकर नदी में प्रवाहित कर दें।
  • कच्चा दूध, जौ, तिल व चावल मिलाकर नदी में प्रवाहित करें। ये उपाय सूर्योदय के समय करें तो अच्छा रहेगा।

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