गुप्त नवरात्रि का पांचवा दिन, आज करें स्कंदमाता की आराधना |

गुप्त नवरात्रि की पंचमी तिथि को स्कंदमाता तथा छठी तिथि को देवी कात्यायनी की पूजा की जाती है। इस दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा-उपासना की जाती है। धार्मिक ग्रन्थों में स्कंदमाता को मोक्ष का द्वार खोलने वाली माता कहा गया है। अतः साधकों को स्कंदमाता की विधि पूर्वक पूजा करनी चाहिए, जिससे साधक को मृत्यु लोक और मृत्यु उपरांत अन्य लोक में भी सुख और आनंद की प्राप्ति हो। मां की महिमा निराली है, वह समस्त मानव समाज का कल्याण करती है। ऐसा माना जाता है कि जो भी भक्त सच्चे दिल से मां को याद करता है, मां उसकी पुकार को जरूर सुनती है और साधक के सभी दुःख और दर्द दूर कर देती हैं|

krishnastrosolutions

भक्तों को सुख-शांति प्रदान करती हैं स्कंदमाता

देवासुर संग्राम के सेनापति भगवान स्कंद की माता होने के कारण मां दुर्गा के पांचवे स्वरूप को स्कंदमाता के नाम से जानते हैं। पांचवे दिन इस शक्ति की उपासना होती है। स्कंदमाता भक्तों को सुख-शांति प्रदान वाली हैं।

स्कंदमाता हमें सिखाती है कि जीवन स्वयं ही अच्छे-बुरे के बीच एक देवासुर संग्राम है व हम स्वयं अपने सेनापति हैं। हमें सैन्य संचालन की शक्ति मिलती रहे, इसलिए मां स्कन्दमाता की पूजा-आराधना करनी चाहिए। इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होना चाहिए जिससे कि ध्यान वृत्ति एकाग्र हो सके। यह शक्ति परम शांति व सुख का अनुभव कराती है।

krishnastrosolutions

ध्यान मंत्र:

सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

अर्थात: मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप का नाम स्कंदमाता है। इनकी चार भुजाएं हैं। दाहिनी तरफ की ऊपर वाली भुजा में भगवान स्कंद गोद में हैं। दाहिने तरफ की नीची वाली भुजा में कमलपुष्प है। बाएं तरफ की ऊपर वाली भुजा वरमुद्रा तथा नीच वाली भुजा में भी कमलपुष्प है।

 

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करे : 9810527992 , 9821314408