चैत्र नवरात्रि 2020: इस दिन से शुरू हो रही है नवरात्रि, जानें घटस्थापना का मुहूर्त, पूजा विधि व महत्व |

चैत्र माह के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से आरंभ होकर रामनवमी तक चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व मनाया जाता है और इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विशेष पूजा की जाती है। नवरात्रि में पूजा के साथ ही पूरे नौ दिनों तक व्रत भी रखा जाता है। माना जाता है कि नवरात्रि में पूरे विधि-विधान से पूजा करने से भक्त की सभी समस्याओं को मां हर लेती है और मनोवांछित फल प्रदान करती है।

इस बार चैत्र नवरात्रि 25 मार्च, बुधवार से आरंभ हो रही है जो 2 अप्रैल, गुरुवार तक मनाई जाएगी। नवरात्रि में घर में माता को स्थापित कर नौ दिनों तक उनके नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। माता की स्थापना को कुछ लोग कलश स्थापना तो कुछ घटस्थापना कहते हैं।

krishnastrosolutions

पता होना चाहिए कि शुभ मुहूर्त में ही घटस्थापना की जाती है ताकि नौ दिनों की पूजा का शुभ फल मिल सके। साथ ही प्रथम दिन की पूजा का भी विशेष महत्व होता है।  माना जाता है कि घट स्थापना करने से घर में सकारात्मकता का वास होता है। घटस्थापना के बाद नौ दिनों तक अखंड ज्योति भी जलाई जाती है और विधि- विधान से पूजा- अर्चना की जाती है। घटस्थापना के बाद ही व्रत की प्रतिज्ञा लेकर व्रत भी रखे जाते हैं।

घटस्थापना का मुहूर्त :

प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ 24 मार्च मंगलवार को दोपहर 2 बजकर 57 मिनट से शुरू हो जायेगा। घटस्थापना का मुहूर्त, 25 मार्च को सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक है। मीन लग्न सुबह 6 बजकर 19 मिनट से 7 बजकर 17 मिनट तक रहेगा |

krishnastrosolutions

चैत्र नवरात्रि का महत्व :

वैसे तो वर्ष में चार नवरात्रि होती है जिसमें से दो गुप्त होती है और दो में विशेष पूजा हर कोई करता है। शारदीय नवरात्रि और चैत्र नवरात्रि दोनों ही विशेष फलदायी होती है। माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि के दिन ही माँ दुर्गा का जन्म हुआ था और उनके कहने पर ही ब्रह्मा ने पृथ्वी का निर्माण किया था। वहीं यहा भी माना जाता है कि चैत्र नवरात्रि के पहले दिन ही सूर्य की पहली किरण पृथ्वी पर पड़ी थी इसलिए इसी दिन हिन्दुओं का नव वर्ष भी मनाया जाता है।

krishnastrosolutions

 विधि-विधान से करें मां दुर्गा की पूजा :

  • नवरात्रि के पहले दिन सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें।स्नान के बाद साफ और स्वच्छ कपड़े पहनें।
  • घर के मंदिर में साफ-सफाई करें।
  • मंदिर में साफ-सफाई करने के बाद एक साफ-सुथरी चौकी बिछाएं।
  • गंगाजल छिड़क कर चौकी को पवित्र करना न भूलें।
  •  चौकी के समक्ष किसी बर्तन में मिट्टी फैलाकर ज्वार के बीज बो दें।
  • मां दुर्गा की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें और दुर्गा जी का रोली से तिलक करें।
  • नारियल में भी तिलक लगाएं।
  • फूलों का हार दुर्गा जी की प्रतिमा को पहनाएं।
  • कलश स्थापना करने से पहले कलश पर स्वास्तिक अवश्य बना लें।
  • कलश में जल, अक्षत, सुपारी, रोली एवं मुद्रा (सिक्का) डालें और फिर एक लाल रंग की चुन्नी से लपेट कर रख दें।

घटस्थापना करने से पहले यह जान लें कि  इस घट को ऐसी साफ़ सुथरी जगह पर रखना है जहां इसे नौ दिन तक हिलाना नहीं है। इसके पास में अखंड दीपक जलायें। जो नौ दिन तक जलना चाहिए। रोज सुबह और शाम आरती करें तो नौवें दिन इस घट का विसर्जन करें।

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करे :9810527992 ,9821314408