शीतला अष्टमी 2020 : जानिए शुभ मुहूर्त और पूजा की सरल विधि |

होली का त्योहार बीत जाने के बाद आने वाली सप्तमी या अष्टमी तिथि को शीतला अष्टमी जिसे बसौड़ा भी कहा जाता है मनाया जाता है। शीतला अष्टमी के एक दिन पहले ही मां शीतला को भोग लगाने के लिए कई तरह के पकवान तैयार किए जाते हैं। इसके बाद अष्टमी पर मां को बासी भोग लगाकर उनको भोग लगाया जाता है। बसौड़ा का पर्व  उत्तर भारत के कई राज्यों में विशेषकर राजस्थान में धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

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शीतला अष्टमी तिथि और पूजा मुहूर्त :

शीतला अष्टमी जिसे बसौड़ा. लसौड़ा या बसियौरा के नाम से भी जाना जाता है चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी-अष्टमी को है। इस बार यह पर्व रविवार, 16 मार्च 2020 है।

शीतला सप्तमी- रविवार( 15 मार्च 2020):

पूजा शुभ मुहूर्त- सुबह 06 बजकर 35 मिनट से शाम 06 बजकर 36 मिनट तक
पूजा अवधि- 12 घंटे 01 मिनट तक

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कैसे करें यह व्रत:

  • शीतला सप्तमी या अष्टमी का व्रत केवल चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की सप्तमी या अष्टमी को होता है|
  • इस दिन व्रती को प्रातःकालीन कर्मों से निवृत्त होकर स्वच्छ व शीतल जल से स्नान करना चाहिए।
  • संकल्प के पश्चात विधि-विधान तथा सुगंधयुक्त गंध व पुष्प आदि से माता शीतला का पूजन करें।
  • इसके पश्चात एक दिन पहले बनाए हुए (बासी) खाद्य पदार्थों, मेवे, मिठाई, पूआ, पूरी, दाल-भात आदि का भोग लगाएं।
  • यदि आप चतुर्मासी व्रत कर रहे हो तो भोग में माह के अनुसार भोग लगाएं। जैसे- चैत्र में शीतल पदार्थ, वैशाख में घी और शर्करा से युक्त सत्तू, ज्येष्ठ में एक दिन पूर्व बनाए गए पूए तथा आषाढ़ में घी और शक्कर मिली हुई खीर।
  • तत्पश्चात शीतला स्तोत्र का पाठ करें और शीतला अष्टमी की कथा सुनें।
  • रात्रि में जगराता करें और दीपमालाएं प्रज्ज्वलित करें।
इस दिन व्रती को चाहिए कि वह स्वयं तथा परिवार का कोई भी सदस्य किसी भी प्रकार के गरम पदार्थ का सेवन न करें। इस व्रत के लिए एक दिन पूर्व ही भोजन बनाकर रख लें तथा उसे ही ग्रहण करें।

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