Festival And Vrat Of February : जानिए फरवरी माह के व्रत और त्यौहार , इस विशेष पर्व से होगा आगाज|

फरवरी माह की शुरुआत माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी से हो रही है। महीने की शुरुआत ही आरोग्य सप्तमी या अचला सप्तमी से हो रही है। इसके बाद जया एकादशी, माघ पूर्णिमा, गुरु रविदास जयंती, दयानंद सरस्वती जयंती, विजया एकादशी और महाशिवरात्रि जैसे महत्वपूर्ण त्योहार भी इसी माह में पड़ेंगे। इन सभी व्रत त्योहारों का धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व है।

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इस बार फरवरी का महीना इसलिए भी खास है क्योंकि इस महीने में 2 एकादशी जया एकादशी और विजया एकादशी भी पड़ रही है। इसके साथ ही माघ पूर्णिमा,महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती और महाशिवरात्रि जैसे खास त्योहार भी इसी माह पड़ रहे हैं, ऐसे में श्रद्धा और आस्था की दृष्टि से श्रद्धालुओं के लिए फरवरी का माह बहुत ही खास है। तो चलिए विस्तार से जानते हैं कि इस माह में पड़ने वाले प्रमुख पर्वों के बारे में और उनका धार्मिक महत्व।

आरोग्य सप्तमी, अचला सप्तमी (1 फरवरी, शनिवार):

माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को माघी सप्तमी का त्योहार मनाया जाता है। इस सप्तमी को अचला सप्तमी और मानु सप्तमी भी कहा जाता है। इस बार यह तिथि 1 फरवरी दिन शनिवार को है। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए। साथ ही इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन व्रत रखने से महिलाओं को सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन विधि विधान से सूर्य देव का पूजन और अर्चना करना चाहिए। इस दिन स्नान और अर्घ्यदान करने से आयु, आरोग्य व संपत्ति की प्राप्ति‍ होती है।

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जया एकादशी (5 फरवरी, बुधवार):

माघ मास के शुक्लपक्ष के एकादशी का नाम जया एकादशी है। यह एकादशी सभी पापों को हरने वाली और उत्तम कही गई है। इस बार यह तिथि 5 फरवरी, बुधवार के दिन पड़ रही है। पवित्र होने के कारण यह उपवासक के सभी पापों का नाश करती है और इसका प्रत्येक वर्ष व्रत करने से मनुष्यों को भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत करने से भूत-प्रेत से मुक्ति मिलती है और सभी प्रकार के पापों का नाश होता है। हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार खुद भगवान श्री कृष्ण ने धर्मराज युद्धिष्ठिर को जया एकादशी व्रत का महत्व बताया था। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। एक मान्यता यह भी है कि जो जया एकादशी का व्रत और विधिवत पूजा करता है उसे भूत, प्रेत, पिशाच जैसी योनियों में नहीं भटकना पड़ता है।

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 माघ पूर्णिमा, गुरु रविदास जयंती (9 फरवरी, रविवार):

 

हिंदू पंचांग के अनुसार, माघ माह में पड़ने वाली पूर्णिमा तिथि को माघ पूर्णिमा कहते हैं। धार्मिक दृष्टि से माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि माघ माह में देवता पृथ्वी पर आते हैं और मनुष्य रूप धारण करके प्रयाग में स्नान, दान और जप करते हैं। कहते हैं कि इस दिन प्रयाग में गंगा स्नान करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही संत रविदास जयंती भी माघ पूर्णिमा के दिन मनाते हैं। इस बार माघी पूर्णिमा 9 फरवरी, रविवार के दिन पड़ रही है। संत रविदास की गिनती महान संतों में होती है। रविदास जी को मानने वाले इसदिन पूजापाठ करते हैं और जगह-जगह लंगर भी किया जाता है।

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महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती (18 फरवरी,मंगलवार):

स्वामी दयानंद सरस्वती जी की जयंती इस माह 18 फरवरी, मंगलवार के दिन मना जाएगा। स्वामी दयानंद जी का जन्म गुजरात के टंकारा में हुआ था। उनके पिता का नाम करशनजी लालजी तिवारी और माता का नाम यशोदाबाई था। उनके पिता एक कर-कलेक्टर होने के साथ ब्राह्मण परिवार के एक अमीर, समृद्ध और प्रभावशाली व्यक्ति थे। स्वामी दयानंद सरस्वती आर्य समाज के संस्थापक, आधुनिक भारत के महान चिंतक, समाज-सुधारक और देशभक्त थे।

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विजया एकादशी (19 फरवरी, बुधवार):

फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी को विजया एकादशी के नाम से जाना जाता है।विजया एकादशी का व्रत सभी व्रतों से उत्तम माना गया है। विजया एकादशी का पर्व इस माह 19 फरवरी, बुधवार को मनाया जाएगा। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से मनुष्य के समस्त पाप नष्ट होतें हैं एवं दोनों लोकों में उसकी विजय अवश्य ही होती है।

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महाशिवरात्रि (21 फरवरी, शुक्रवार):

हर महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि कहते हैं लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी पर पड़ने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि कहा जाता है, जिसे बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। महाशिवरात्रि हिंदुओं के प्रमुख त्योहार में से एक है। यह भगवान शिव का प्रमुख पर्व है। इस साल महाशिवरात्रि 21 फरवरी, शुक्रवार के दिन पड़ रही है। मान्यता है कि सृष्टि का प्रारंभ इसी दिन से हुआ था। अधिकतर लोग यह मानते हैं कि इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। इस दिन शंकर भगवान और शिवलिंग की विशेष पूजा-आराधना की जाती है और व्रत भी रखा जाता है।

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