Karwa Chauth 2019: पहली बार रख रही हैं व्रत तो काम आ सकती हैं ये बातें, जरूर जान लें |

करवाचौथ का त्योहार विवाहित स्त्रियों के लिए एक खास पर्व है। हर साल सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए इस व्रत को रखती हैं। विवाहित स्त्रियों के लिए वैसे तो सभी व्रत बहुत ही खास होते हैं लेकिन करवाचौथ का व्रत अलग ही महत्व है, पूरे साल महिलाएं इस दिन का इंतजार करती हैं। इस साल करवाचौथ का व्रत 17 अक्टूबर को गुरुवार के दिन मनाया जाएगा, जो महिलाएं पहली बार इस व्रत को रखेंगी उनके लिए ये दिन और भी विशेष है।

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खास है पहला करवाचौथ:

हर साल की तरह महिलाओं के बीच इसे लेकर भारी उत्सुकता देखी जा सकती है, वहीं कुछ ऐसी भी लड़कियां हैं जो पहली बार करवाचौथ का व्रत रखेंगी। वैसे तो कुछ लड़कियां शादी से पहले भी करवाचौथ का व्रत करती हैं लेकिन शादी के बाद पड़ने वाले पहले करवाचौथ का अपना अलग ही महत्व होता है, धार्मिक दृष्टि से भी पहला करवाचौथ महत्वपूर्ण होता है। पहली बार व्रत और पूजा करने वाली स्त्रियों को इससे जुड़ी परंपरा और नियम जानना आवश्यक है।

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करें 16 श्रृंगार:

इस दिन खास दिखने के लिए महिलाएं कई दिन पहले से तैयारियां शुरू करती हैं। इसलिए पूजन की तैयारी हो या पूजा का श्रृंगार सब कुछ परंपरानुसार ही करना चाहिए। इसलिए पहली बार व्रत रख रहीं महिलाओं को पूरे 16 श्रृंगार के साथ ही पूजा में बैठना शुभ माना जाता है। शगुन स्वरूप हाथ में मेंहदी भी लगानी चाहिए।

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शादी का जोड़ा है शुभ:

जिन महिलाओं का पहला करवा चौथ है उन्हें शादी का जोड़ा पहनकर करवा चौथ पूजन करना चाहिए। अगर शादी का जोड़ा पहनना संभव ना हो तो लाल साड़ी या लहंगा भी पहन सकते हैं। पहले करवाचौथ पर दुल्हन की तरह तैयार होना चाहिए। होती हैं। वैसे लाल रंग का जोड़ा पहनना इस दिन शगुन माना जाता है। इसके अलावा हरा और कई रंग हैं जो इस दिन पहने जा सकते हैं।

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सरगी से होती है शुरुआत:

पहली बार करवा चौथ का व्रत रख रही महिलाओं को इस दिन सुबह जल्दी उठकर अपने बड़ों का आशीर्वाद लेना चाहिए, ऐसा करने से परिवार में सौभाग्य और समृद्धि बनी रहती है। करवा चौथ के दिन सुबह सरगी के साथ दिन की शुरुआत होती है। पहली बार करवाचौथ करने वाली नवविवाहित की सास सरगी के रूप में व्रत से पहले बहू को मिठाइयां,कपड़े और श्रृंगार का सामान देती हैं। इसके बाद वे पूरे दिन का निर्जल उपवास रखती हैं।

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बाया देना भी होता है शगुन:

जिस तरह सास को अपनी बहू को सरगी देनी चाहिए वैसे ही लड़की के मायके से बाया भी आता है। बाया मायके से जुड़ा एक रिवाज है। पहली बार करवाचौथ का व्रत कर रही महिलाओं के घर भी शाम को पूजा से पहले मायके से ससुराल में कुछ मिठाइयां, तोहफे और मेवे उपहारस्वरूप भेंट किए जाने की रस्म है, यही रस्म बाया कहलाती है। बाया पूजा शुरू होने से पूर्व ही बेटी के ससुराल पहुंचा दी जानी चाहिए।

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ध्यान से सुनें कथा:

करवा चौथ में जितना महत्व व्रत और पूजा का है, समान महत्व करवा चौथ के व्रत की कथा सुनने का भी उतना महत्व है। इस व्रत में जिस तरह जरूरी व्रत और विधिविधान से पूजा करना चाहिए वैसे ही कथा सुनना भी उतना ही शुभ फलदायी है, इसलिए जो महिलाएं पहली बार इस व्रत को कर रही हैं उन्हें पूजा के साथ ध्यान से कथा सुननी चाहिए।

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गीत और भजन:

करवाचौथ की पूजा बहुत सी महिलाएं एक साथ इकट्ठे होकर करती हैं। सभी साथ में व्रत कथा सुनती हैं और पूजा करती हैं। ऐसे में पूजा के समय करवा चौथ के गीत और भजन गाना चाहिए। करवा चौथ पर गीत गान और भजन का भी बहुत महत्व है। ऐसा करने से वातावरण शुद्ध होता है और इस व्रत के पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। चूंकि जो महिलाएं पहली बार यह व्रत कर रही होती हैं उन्हें इन सभी रस्मों को करना चाहिए, ताकि आगे भविष्य में वह अच्छे से यह पूजा कर सकें।

ऐसे खोलते हैं व्रत:

इस दिन स्त्रियां पूरे दिन घर में तरह-तरह के व्यंजन और मिठाइयां बनाती हैं। शाम को स्त्रियां पूजा करके चंद्रमा को जल का अर्घ्य देती हैं। फिर चलनी में चांद और पति को देखती हैं और पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं। करवा चौथ की पूजा के बाद पहला बाया सभी परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के बीच बांटना चाहिए।

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