पितरों का शनि-राहु-केतु से क्या संबंध? जरूर करें ये 5 उपाय |

पितरों का सम्बन्ध हमारे जन्मों से, संस्कारों से और भावनाओं से होता है. शनि का सम्बन्ध हमारे पूर्व जन्म के कर्मों और हमारे पितरों की स्थिति से होता है. राहु का सम्बन्ध हमारे दायित्व और ऋणों से होता है. केतु का सम्बन्ध हमारे पितरों और उनके मुक्ति मोक्ष से होता है. इस प्रकार शनि राहु और केतु से हम अपने दायित्व और अपने पितरों की स्थिति जान सकते हैं |

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शनि-राहु-केतु पितरों के बारे में क्या बताते हैं:

  • शनि का अच्छा होना ये बताता है कि हमारे पूर्व जन्म के कर्म उत्तम रहे हैं|
  • राहु और केतु का अच्छा होना बताता है कि हमारे पितर संतुष्ट हैं और उनकी कृपा हमारे ऊपर बनी हुयी है|
  • अगर शनि या सूर्य का सम्बन्ध राहु से हो तो पितरों का दायित्व बाकी रहता है|
  • उनकी तृप्ति या मुक्ति नहीं हो पाती ,इस दशा को पितृ दोष कहा जाता है|
  • बृहस्पति अच्छा होने पर पितृ सम्बन्धी हर समस्या से मुक्ति मिल जाती है|

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कैसे करें पितरों और शनि की शांति:

  • पितृपक्ष में पीपल के वृक्ष में तिल मिला हुआ जल अर्पित करें|
  • निर्धनों को भोजन कराएं और भोजन में उरद की दाल की बनी हुई वस्तुएं जरूर हों|
  • जितना संभव हो पेड़ पौधे लगाएं|
  • नित्य दोपहर “ॐ सर्व पितृ प्रसन्नो भव ॐ” का 108 बार जप करें|
  • पूरे माह में सात्विक रहें|

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राहु-केतु के निवारण के लिए क्या उपाय करें:

  •  पितृ पक्ष में किसी भी दिन दोपहर के समय ये प्रयोग करें|
  • सफ़ेद वस्त्र धारण करें, हाथ में कच्चा सूत, सफेद मिठाई ले लें और सफेद वस्त्र धारण करें|
  • अब मिठाई हाथ में ले लें, और कच्चे सूत को पीपल की परिक्रमा करते हुये सात बार लपेटें|

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ये उपाय भी करें:

सूत लपेटते हुए कहते जाएं कि आपके ऊपर पितरों की कृपा हो और आपके राहु केतु शांत हों- परिक्रमा के बाद मिठाई को पीपल की जड़ में डाल दें, और वहां जल अर्पित करें आपके राहु केतु शांत हो जाएंगे|

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