नवरात्र 2019: अष्‍टमी-नवमी आज, ऐसे करें महागौरी और मां सिद्धिदात्री की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त |

चैत्र नवरात्र का आठवां दिन शनिवार 13 अप्रैल को है। सुबह 11.41 बजे तक अष्टमी तिथि है। इसके बाद नवमी तिथि लग जा रही है। इसीलिए शनिवार को मां महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा करना शुभ है। अष्टमी के दिन आदिशक्ति देवी दुर्गा की आठवें स्वरूप मां महागौरी और नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। जहां महागौरी की आराधना से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं, वहीं मां सिद्धिदात्री अपने उपासक को सभी सिद्धियां प्रदान करती हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व ये आठ सिद्धियां हैं। अपने उपासक को ये सभी सिद्धियां देने के कारण ही इन्हें सिद्धदात्री कहा जाता है।

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डमरूधारी हैं देवी:

मां महागौरी के एक हाथ में दुर्गा शक्ति का प्रतीक त्रिशूल और दूसरे हाथ में भगवान शिव का प्रतीक डमरू है। डमरू धारण करने के कारण इन्हें शिवा भी कहा जाता है। इनके तीसरा हाथ वरमुद्रा में हैं और चौथा हाथ एक गृहस्थ महिला की शक्ति को दर्शाता हुआ है। देवी सांसारिक रूप में उज्ज्वल, कोमल, श्वेत वर्णी, श्वेत वस्त्रधारी और चतुर्भुजा हैं। ये सफेद वृषभ (बैल) पर सवार रहती हैं।

 

महागौरी को यह लगाएं भोग:

महागौरी की पूजा करते समय नारियल, हलवा, पूड़ी और सब्जी का भोग लगाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से काले चने का प्रसाद बनाया जाता है। पूजन के बाद कुंवारी कन्याओं को भोजन कराने और उनका पूजन करने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

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मां महागौरी के मंत्र:

श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।महागौरी शुभं दद्यान्त्र महादेव प्रमोददा।।

या देवी सर्वभूतेषु माँ गौरी रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

शुभ मुहूर्त:

13 अप्रैल, 2019:

अष्टमी तिथि, सुबह 11:42 बजे तक, इसके बाद नवमी तिथि प्रारंभ

14 अप्रैल, 2019:

नवमी तिथि: सुबह 9.36 बजे तक, इसके बाद दशमी तिथि प्रारंभ

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मां सिद्धिदात्री:

ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की उपासना करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जो भक्त नौं दिन का व्रत रखते हैं, उनका नवरात्र व्रत नौ कन्याओं को नौ देवियों के रूप में पूजने के बाद ही पूरा होता है। उन्हें अपने सामर्थ्य के अनुसार भोग लगाकर दक्षिणा देने से ही मां दुर्गा प्रसन्न हो जाती हैं। इसके बाद ही प्रसाद ग्रहण करके व्रत खोलना चाहिए। शक्ति पूजन का अंतिम दिन होने से ये दिन काफी विशेष होता है।

ऐसा है मां का स्वरूप:

मां दुर्गा इस रूप में श्वेत वस्त्र धारण की है। मां सिद्धिदात्री चार भुजाओं से युक्त हैं। इनका वाहन सिंह है। यह कमल पुष्प पर भी आसीन होती हैं। इनकी दाहिनी तरफ के नीचे वाले हाथ में कमलपुष्प है।

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माता सिद्धिदात्री का मंत्र:

सिद्धगंधर्वयक्षाद्यैर सुरैररमरैरपि।

सेव्यमाना सदा भूयात सिद्धिदा सिद्धिदायिनी||

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करे :9810527992 ,9821314408