आमलकी एकादशी पर इस विधि से करें विष्‍णु जी की पूजा, मिलेगा संतान सुख |

हर साल चौबीस एकादशियां आती हैं। हिंदू धर्म में कादशी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। 17 मार्च को आमलकी एकादशी मनाई जा रही है। इसे आंवला एकादशी के रूप में मनाते हैं। जिस तरह से शास्त्रों में नदियों में गंगा को पहला स्‍थान प्राप्त है ठीक उसी तरह से आवंले को भी पहला स्‍थान दिया गया है।

इस दिन व्रत करके पूजा पाठ करने से विष्णु और लक्ष्मी जी का वरदान प्राप्‍त होता है। इस दिन आंवले के वृक्ष तथा विष्णु लक्ष्मी की पूजा की जाती है। इससे आपके बच्चों को जीवन में बड़ा पद प्राप्‍त होगा। भगवान विष्णु ने कहा है जो प्राणी स्वर्ग और मोक्ष प्राप्ति की कामना रखते हैं उनके लिए फाल्गुन शुक्ल पक्ष में जो पुष्य नक्षत्र में एकादशी आती है उस एकादशी का व्रत अत्यंत श्रेष्ठ है। इस एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है|

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आमलकी एकादशी का महत्व:

इस दिन व्रत रखने से इंसान की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और वह जीवन के हर क्षेत्र में आगे बढ़ता है। इस दिन मंदिर भी जाना चाहिए तथा गाय को भोजन करवाना चाहिए। मन, वचन तथा कर्म से किसी को कष्ट मत दें तथा अहिंसा का पालन करें। आप यदि चाहें तो किसी विशेष उद्देश्य की पूर्ति हेतु पूजा का संकल्प भी करके इस व्रत को रख सकते हैं।

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आमलकी एकादशी की पूजा विधि:

  • एक वेदी बनाकर उस पर सप्त धन्य रखकर मिट्टी का कलश स्थापित करते हैं।
  • पूजास्थल पर ही विष्णु जी की मूर्ति स्थापित करें। अब श्री विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें।
  • ॐ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करें। पूरी रात्रि सामूहिक भगवान के नाम का संकीर्तन करें।
  • भजन करें। इस दिन भगवान विष्णु का श्रृंगार भी कर सकते हैं।
  • श्री रामचरितमानस का पाठ करना भी शुभ फलदायी है।
  • व्रत रखकर अगले दिन शुभ मुहूर्त में ब्राम्हणों को भोजन कराके तथा दान करके खुद भोजन करके व्रत का पारण करते हैं।

एकादशी के व्रत में घर में चावल नहीं बनना चाहिए तथा घर का वातावरण पूरा सात्विक हो। श्रद्धा तथा समर्पण पूर्वक व्रत तथा पूजा से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति करवाते हैं।

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