रथ सप्तमी 2019: भगवान सूर्य का सबसे बड़ा व्रत, 7 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग |

सूर्य और चंद्र प्रत्यक्ष देव माने जाते हैं। अन्य देवता अदृश्य रूप से पृथ्वी और स्वर्ग में विचरण करते हैं, परंतु सूर्य को साक्षात देखा जा सकता है। इस पृथ्वी पर सूर्य जीवन का सबसे बड़ा कारण है। प्राचीनकाल से ही कई सभ्यताओं तथा धर्मों में सूर्य को वंदनीय व देवता माना जाता रहा है। इसकी शक्ति और प्रताप के गुणों से धर्मग्रंथ भरे पड़े हैं।

वर्ष 2019 में माघ शुक्ल सप्तमी यानी मंगलवार, 12 फरवरी को भगवान भास्कर की जयंती सूर्य सप्तमी मनाई जाएगी। इसे अचला या रथ सप्तमी भी कहते हैं। पौराणिक शास्त्रों में माघ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य का आर्विभाव दिवस बताया गया है। इस दिन नमक रहित भोजन तथा उपवास करने का विशेष महत्व है। इस दिन गंगा नदी पर स्नान करने की बड़ी महिमा है।

 

इस दिन गुड़ का सेवन करते हैं। सूर्य की रोग शमन शक्ति का उल्लेख वेदों, पुराणों और योगशास्त्र आदि में विस्तार से किया गया है। आरोग्यकारक शरीर को प्राप्त करने के लिए अथवा शरीर को निरोग रखने के लिए सूर्य सप्तमी अथवा भानु सप्तमी के दिन सूर्य की उपासना के अनेकानेक कृत्य कई प्रयोजनों एवं प्रकारों से किए जाते हैं। इस कारण माघ शुक्ल पक्ष की सप्तमी को अर्क, अचला सप्तमी, सूर्यरथ सप्तमी, आरोग्य सप्तमी और भानु सप्तमी आदि के विभिन्न नामों से जाना जाता है। इस दिन जो भी व्यक्ति सूर्यदेव की उपासना करता है, वह सदा निरोगी रहता है।

 

कब है सप्‍तमी:

इस साल ये तिथि 12 फरवरी को है. इस दिन भगवान सूर्य की पूजा का विशेष विधान होता है|

क्‍या है महत्‍व:

इस दिन सूर्यदेव की आराधना का अक्षय फल मिलता है. भगवान सूर्य, भक्तों को सुख-समृद्धि एवं अच्छी सेहत का वरदान देते हैं. इसलिए इसे आरोग्‍य सप्‍तमी भी कहा जाता है|

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दुर्लभ संयोग:

माघ शुक्ल सप्तमी तिथि पर कृतिका व भरणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है. ऐसा संयोग सात साल बाद बना है. कहा जाता है कि इसी तिथि को ही भगवान सूर्य ने पहली बार प्रकाश प्राप्त किया था|

क्‍या करें इस दिन:

सूर्य देव की पूजा करें. उन्‍हें अर्घ्‍य अवश्‍य दें. साथ ही “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय नम:” इस बीज मंत्र का यथाशक्ति जाप करें. व्रत रखें. नमक रहित भोजन करें. हो सके तो गंगा स्नान करें. इस दिन गुड़ का सेवन जरूर करना चाहिए|

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