आज सर्वपितृ अमावस्या, जानें क्यों इसी दिन करना चाहिए पितरों का श्राद्ध |

हिन्दू धर्म में अश्विन मास के कृष्ण पक्ष के दौरान ‘पितृ पक्ष’ आता है। 15 से 16 दिनों तक चलने वाले इस काल में पितरों की शांति और परिवार का सुख पाने के लिए धार्मिक कर्मकांड किए जाते हैं। इस साल 24 सितंबर से पितृ पक्ष प्रारंभ हुए और आज यानी 8 अक्टूबर को ‘सर्वपितृ अमावस्या’ के साथ इसका समापन हो रहा है। आज ही के दिन ‘महालय’ पर्व भी है जिसे बंगालियों में महत्वपूर्ण माना जाता है।

krishnastrosolutions

सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध क्यों:

16 दिनों तक चलने वाले पितृ पक्ष में हिन्दू अपने पितरों की शांति के लिए श्राद्ध करते हैं। इस पूरे काल में तिथि अनुसार श्राद्ध किया जाता है। लेकिन सभी तिथियों में से सबसे महत्वपूर्ण श्राद्ध की अमावस्या यानी सर्वपितृ अमावस्या होती है। इसीदिन श्राद्ध करने पर जोर दिया जाता है, लेकिन ऐसा क्यों यह भी जानते हैं।

सर्वपितृ अमावस्या पर ही पितरों का श्राद्ध करने के पीछे शास्त्रों में दो कारण दर्ज हैं। पहले कारण के अनुसार यदि किसी को अपने पितरों के श्राद्ध करने की तिथि मालूम ना हो, वह इस दुविधा में हो कि किस तिथि को उसके किस मृत परिजन का श्राद्ध किया जाना चाहिए, तो वह सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर सकता है। अमावस्या होने के कारण यह दिन महत्वपूर्ण होती है और इस दिन किया गया श्राद्ध अधिक फलित भी माना गया है।

दूसरी वजह के अनुसार सर्वपितृ अमावस्या के दिन यदि पितरों का श्राद्ध किया जाए, पूजा के दौरान पितरों के नाम की धूप जलाई जाए, दान किया जाए तो इससे तन, मन और घर में शांति आती है। रोग और शोक से भी परिवार वालों को मुक्ति मिलती है।

krishnastrosolutions

महालय का महत्व

सर्वपितृ अमावस्या के अलावा अश्विन मास की अमावस्या की रात ही ‘महालय’ भी मनाया जाता है। इसे बगाली समुदाय के लोग अधिक मनाते हैं। इसमें लोग तैयार होकर अमावस्या की काली अंधेरी रात में मंदिर जाते हैं और मां दुर्ग्सा के आगमन की तैयारियां करते हैं।

krishnastrosolutions

इस तरह घर पर ही कर सकते हैं श्राद्ध और तर्पण:

 

  • इसके लिए सुबह उठकर नहाएं, उसके बाद पूरे घर की सफाई करें। घर में गंगाजल और गौमूत्र भी छीड़कें।

  • दक्षिण दिशा में मुंह रखकर बांए पैर को मोड़कर, बांए घुटने को जमीन पर टीका कर बैठ जाएं। इसके बाद तांबे के चौड़े बर्तन में काले तिल, गाय का कच्चा दूध, गंगाजल और पानी डालें। उस जल को दोनों हाथों में भरकर सीधे हाथ के अंगूठे से उसी बर्तन में गिराएं। इस तरह 11 बार करते हुए पितरों का ध्यान करें।

  • घर के आंगन में रंगोली बनाएं। महिलाएं शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन बनाएं। श्राद्ध के अधिकारी व्यक्ति यानी श्रेष्ठ ब्राह्मण को न्यौता देकर बुलाएं। ब्राह्मण को भोजन करवाएं और निमंत्रित ब्राह्मण के पैर धोने चाहिए। ऐसा करते समय पत्नी को दाहिनी तरफ होना चाहिए।

  • पितरों के निमित्त अग्नि में गाय के दूध से बनी खीर अर्पण करें। ब्राह्मण भोजन से पहले पंचबलि यानी गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।

  • दक्षिणाभिमुख (दक्षिण दिशा में मुंह रखकर) होकर कुश, जौ, तिल, चावल और जल लेकर संकल्प करें और एक या तीन ब्राह्मण को भोजन कराएं। इसके बाद भोजन थाली अथवा पत्ते पर ब्राह्मण हेतु भोजन परोसें।

  • प्रसन्न होकर भोजन परोसें। भोजन के उपरांत यथाशक्ति दक्षिणा और अन्य सामग्री दान करें। इसमें गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी तथा नमक (जिसे महादान कहा गया है) का दान करें। इसके बाद निमंत्रित ब्राह्मण की चार बार प्रदक्षिणा कर आशीर्वाद लें। ब्राह्मण को चाहिए कि स्वस्तिवाचन तथा वैदिक पाठ करें तथा गृहस्थ एवं पितर के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त करें।

  • श्राद्ध में सफेद फूलों का ही उपयोग करें। श्राद्ध करने के लिए दूध, गंगाजल, शहद, सफेद कपड़े, अभिजित मुहूर्त और तिल मुख्य रूप से जरूरी है।

अधिक जानकरी के लिए सम्पर्क करे :9810527992 ,7011200192